Guru Purnima 2020 [मानव जीवन मे गुरु का महत्व]
हमारे देश में गुरूओं का बहुत सम्मान किया जाता है। क्योंकि एक गुरु ही है जो अपने शिष्य को गलत मार्ग से हटाकर सही रास्ते पर लाता है।
भारतीय संस्कृति बहुत पुरानी है और इसमें गुरु बनाने की परंपरा भी बहुत पुरानी रही है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक गुरु अवश्य बनाता है ताकि गुरु उनके जीवन को नई सकारात्मक दिशा दिखा सके। जिस पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल व सुखमय बना सके एवं मोक्ष प्राप्त कर सके।
गुरु का महत्व बताते हुए परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि
भावार्थ :- कबीर परमेश्वर जी हमें बता रहे हैं कि बिना गुरु के हमें ज्ञान नहीं हो सकता है। गुरु के बिना किया गया नाम जाप, भक्ति व दान- धर्म सभी व्यर्थ है।
कबीर, गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।।
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| Importance of guru |
कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरु कीन्ह।तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन।भावार्थ :-कबीर परमेश्वर जी हमें समझाना चाहते हैं कि आप जी श्री राम तथा श्री कृष्ण जी से तो किसी को बड़ा अर्थात् समर्थ नहीं मानते हो। वे तीन लोक के मालिक थे, उन्होंने भी गुरू बनाकर अपनी भक्ति की, मानव जीवन सार्थक किया।
पुराणों में प्रमाण है कि श्री रामचन्द्र जी ने ऋषि वशिष्ठ जी से नाम दीक्षा ली थी और अपने घर व राज-काज में गुरू वशिष्ठ जी की आज्ञा लेकर कार्य करते थे। श्री कृष्ण जी ने ऋषि संदीपनि जी से अक्षर ज्ञान प्राप्त किया तथा श्री कृष्ण जी के आध्यात्मिक गुरू श्री दुर्वासा ऋषि जी थे।
कबीर, हरि सेवा युग चार है, गुरु सेवा पल एक।भावार्थ :-बिना गुरु धारण किए परमात्मा की भक्ति चार युग तक करते रहना और गुरु धारण करके एक पल अर्थात् एक नाम का स्मरण भी कर लिया तो उसके समान मनमुखी साधना चार युग वाली नहीं है अर्थात् कम है।
तासु पटन्तर ना तुलैं, संतन किया विवेक।
कबीर, ये तन विष की बेलड़ी, गुरु अमृत की खान। शीश दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।
भावार्थ :-यदि गुरु भी नहीं मिलते हैं तो यह मानव शरीर विषय-विकारों रुपी जहर का घर है। गुरु तत्वज्ञान रुपी अमृत की खान है जो मानव को विषय-विकारों से हटाकर अमृत ज्ञान से भर देता है। ऐसा तत्वदर्शी सन्त शीश दान करने से भी मिल जाए तो सस्ता ही जानें। शीश दान का भावार्थ है कि गुरु दीक्षा किसी भी मूल्य में मिल जाए।
■ उपर्युक्त लिखी गई कुछ पंक्तियां एवं दोहों से हमें यह तो समझ में आ गया कि बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं है।
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे।
