आखिर कैसे होगा ? बेरोजगारी का खात्मा
बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं।
गरीबी के नाम पर आज तक अरबों-खरबों रूपये बाँटे जा चुके हैं, किन्तु गरीबी है कि वह जमी हुई है। गरीबी के नाम पर सरकार की समस्त योजनाएं क्यों फेल हो रही हैं? कारण सीधा-सादा है, सच्चे मन से प्रयास न होना।
देश में काम करने वालों की कोई कमी नहीं है, लाखों करोड़ों युवा विभिन्न डिग्रियाँ लिए सुनहरे भविष्य के सपने संजोये बूढ़े हुये जा रहे हैं। इन्हें शासन से काम चाहिये और काम उन्हें तभी मिल सकता है जब ग्रामीण स्तर तक रोजगार के अवसर मुहैय्या हों।
रोजगार के अवसर मुहैय्या कराने के लिये शासन को ग्रामीण स्तर तक रोजगार प्रशिक्षण केंद्र खोलने की व्यस्था करनी चाहिए जहां – पापड़, अचार, मुरब्बा, डबल रोटी, बिस्कुट इत्यादि से लेकर रिपेयरिंग के सम्पूर्ण कार्यों का प्रशिक्षण नि:शुल्क देने की व्यवस्था करनी चाहिये ताकि गरीब से गरीब युवक सेवा, व्यवसाय इत्यादि के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर अपने सपने साकार कर सके।
इससे जहां एक ओर लाखों-करोड़ों युवाओं की रोजी-रोटी की समस्या हल हो सकेगी, वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करने में भी ये संस्थायें सफल हो सकेंगी। यहां एक बात और स्पष्ट कर देना चाहूंगी, शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र शैक्षणिक मामले में अभी भी काफी पिछड़े हुये हैं।
इन संस्थाओं में शैक्षणिक अंकों के आधार पर न रख कर उनके व्यवहारिक ज्ञान व उत्साह को ही आधार माना जाये। विद्यालयों में पढऩे वाले सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण नहीं होते। इनमें से कई द्वितीय, तृतीय व कुछ तो मुश्किल से उत्तीर्ण ही हो पाते हैं किन्तु इसका यह आशय बिल्कुल नहीं है कि पढ़ाई में किन्हीं कारणों से पिछड़े छात्र निपट मूर्ख ही होते हैं बल्कि कई मायनों में ये मेधावी छात्रों से भी तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं।
बस जरूरत है तो उन्हें रोजगार व प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने की, जहां तक मेधावी छात्रों का सवाल है तो उनके लिये सफलता के कई द्वार खुले हैं, उपरोक्त योजनाओं के क्रियान्वयन से जहां एक ओर ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन रूकेगा वहीं लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और चोरी, डकैती, हत्या इत्यादि आपराधिक गतिविधियां भी थमेंगी।
बेरोजगारी को दूर करने के उपाय:-
- जनसँख्या को नियंत्रित करना
- कृषि का विकास
- रोजगार दफ्तरों की स्थापना
- रचनात्मक कार्य
भारत में बेरोज़गारी की समस्या अधिक है जिसके कारण गरीबी की समस्या हल नहीं हो पा रही है।
बेरोज़गारी को दूर करने के लिए:
बेरोज़गारी को दूर करने के लिए:
शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाज सेवाओं तथा कार्यालयों का विस्तार एवं विकास होने से रोजगार के अवसर बढ़ेगा। इसी तरह बाँध, पुल, सड़क, पार्क एवं नदी-घाटी आदि के निर्माण के कार्यों को बढ़ावा देकर अनेक बेरोजगार व्यक्तियों के श्रम का उपयोग किया जा सकता है।
सरकार को छोटे उद्योगों को मदद करनी चाहिए, नये कारखाने खोलने चाहिए जहाँ लोगों को नौकरी मिल सके।
शिक्षा के अतिरिक्त तकनीकी कोचिंग भी देनी चाहिए ताकि लोग भिन्न प्रकार के काम कर सकें और उन्हें रोज़गार मिले।
सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जिससे हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को जरुर नौकरी मिल सके।
सरकार को देश की उन्नति के लिए नित्य नयी योजनायें अपनानी चाहिए और सरकार को सरकारी पूंजी को नियंत्रण में रखना चाहिए, भारतीय बाजार को विदेशों में भी फैलाना होगा।
देश में बेरोजगारी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हालाँकि सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं पर अभी तक वांछनीय प्रगति हासिल नहीं हो पाई है।


















