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Friday, July 10, 2020

Sawan Somvar Vrat 2020 [Hindi]

◆सावन सोमवार व्रत का महत्व◆

Shrimad bhagwad gita
Sawan Somvar Vrat 

आइए जानते है सावन के सोमवार व्रत के बारे वास्तविक जानकारी।

सावन सोमवार व्रत का महत्व तथा शिवजी की विशेष पूजा:  हिन्दू मान्यता के अनुसार सावन महीने को शिवजी का प्रिय माना गया है माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव की अराधना से विशेष लाभ प्राप्त होता है। ... क्योंकि इस पूरे महीने भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सावन का महीना भगवान शिव का पसंदीदा माना गया है जिस कारण इस महीने में आने वाले सोमवार का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। क्योंकि सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित है।

  • सावन के सोमवार के व्रत क्यों किये जाते है?

  •  क्या शिवलिंग की पूजा और जलाभिषेक करने से मोक्ष सम्भव है??
  •  व्रत करना गीता अनुसार कैसा है? तथा इससे मोक्ष सम्भव है?
  • क्या तीन देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की भक्ति करने मोक्ष सम्भव है?

 हर सोमवार को शिवजी की पूजा की जाती है पर सावन के महीने में सोमवार को शिवजी की पूजा करना उत्तम माना जाता है सावन महीने में शिवजी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है तथा सयोंग से इस साल यह महीना (सोमवार) 6 जुलाई 2020 से शुरू होकर (सोमवार) 3 अगस्त 2020 को समाप्त होगा।

सावन के सोमवार के व्रत क्यों किये जाते है?

माता पार्वती ने सावन के महीने में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी ।
जब सती पार्वती जी ने इस महीने शिवलिंग पूजा, उनकी आराधना की फिर उनकी कामना पूर्ण हुई। माना जाता है कि पार्वती जी की कठोर तपस्या से प्रसन्न शिवजी जी भगवान को सावन का महीना सबसे प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन महीने में आने वाले सोमवार को भगवान शिव की पूजा अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।  इस महीने में लोग सुखी विवाहित जीवन की कामना के लिए व्रत रखते हैं। इसके साथ ही महिलाएं अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए भी इस महीने व्रत रखती हैं।
भगवान शिव की पूजा के लिए और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से सावन सोमवार व्रत रखे जाते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण महीने के सोमवार व्रत, जो व्यक्ति करता है उसकी सभी इछाएं पूर्ण होती है। इन दिनों किया गया दान पूण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल देने वाला होता है। इस व्रत का पालन कई उद्देश्यों से किया जा सकता है।

वैवाहिक जीवन की लम्बी आयु और संतान की सुख-समृद्धि लिये या मनचाहा वर की प्राप्ति करती है। माना जाता है सावन सोमवार व्रत कुल वृद्धि, लक्ष्मी प्राप्ति और सुख -सम्मान देने वाले होते हैं।

क्या शिवलिंग की पूजा और जलाभिषेक करने से मोक्ष सम्भव है??

सावन महीने में मुख्य रूप से शिव लिंग की पूजा होती है

इन दिनों में भगवान शिव की पूजा जब बेलपत्र से की जाती है, तो भगवान अपने भक्त की कामना जल्द से पूरी करते है। बिल्व पत्थर की जड में भगवान शिव का वास माना गया है।
माता पार्वती ने सावन के महीने में भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी ।

वह शिवलिंग बना कर उसकी पूजा आराधना करती थी इसी कारण इस महीने में शिवजी के भक्त शिवलिंग की पूजा अर्चना करते है। शिव पुराण की इस कथा से प्रेरित होकर शिवभक्त शिवलिंग की पूजा करना बहुत शुभ और मनोकामना पूर्ण होने वाली मानते है जब सती पार्वती जी ने इस महीने शिवलिंग पूजा, उनकी आराधना की फिर उनकी कामना पूर्ण हुई, तो भगवान शिव हमारी कामना भी अवश्य पूर्ण करेंगे ।

पौराणिक कथा है कि शिवजी को जल से शीतलता मिली थी। जब शिव जी विष को धारण कर रहे थे उस समय माता पार्वती ने उनके गले को दबाए रखा, माता पार्वती को डर लग रहा था कि विष शरीर के अंदर न चला जाये । जिससे विष का प्रभाव केवल गले में हुआ और शेष शरीर पर इसका प्रभाव से नही हुआ। विष के प्रभाव से शिवजी का कण्ठ नीला हो गया। इसलिए इन्हें "नीलकण्ठ" कहा जाता है विष के प्रभाव से शिवजी  को असहनीय गर्मी को सहन करना पड़ा। कैलाश पति को विष की गर्मी से छुटकारा दिलवाने के लिए इंद्र ने वर्षा करवाई थी। शिवजी ने सावन के महीने में ही विषपान किया था। इस कथा से प्रेरित भक्त इस महीने में शिवजी को जल चढ़ाते है । यह मान्यता है कि शिवजी को जल चढ़ाने से शिवजी बहुत खुश होते है । लोगों का कहना है उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है ।

व्रत करना गीता अनुसार कैसा है ? तथा क्या इससे मोक्ष सम्भव है ?

श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में मना किया है कि हे अर्जुन ! यह योग ( भक्ति ) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले , न अधिक सोने वाले की तथा न अधिक जागने वाले की सफल होती है।
इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रुप से मना है।
अर्थात् गीताजी के अनुसार व्रत करना व्यर्थ है। यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है जिसके कारण व्रत करने से मोक्ष सम्भव नही है।
Bhagwad gita
Gita Saar


क्या तीन देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की भक्ति करने मोक्ष सम्भव है?

Lord shiva, lord krishna
Brahma, Vishnu, Mahesh

आज तक हिन्दू समाज में तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) को अजर - अमर बताया गया।
परन्तु हमारे शास्त्र प्रमाणित करते है कि इनकी जन्म- मृत्यु होती है।
ब्रह्मा विष्णु महेश अजर-अमर नहीं है। 
पवित्र देवी भागवत महापुराण ( तृतीय स्कंध पेज नंबर 123) पर प्रमाणित है, कि ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म मृत्यु हुआ करती है, तथा यह स्वयं स्वीकार करते हैं कि हमारा तो आविर्भाव अर्थात जन्म, तिरोभाव अर्थात मृत्यु हुआ करती है।

श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 8 के श्लोक 16 व अध्याय 9 का श्लोक 7 में बताया है कि ब्रह्म लोक से लेकर ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी आदि के लोक और ये स्वयं भी जन्म मरण व प्रलय में है । इसलिए ये अविनाशी नहीं हैं । जब ये अविनाशी नहीं है तो इनके उपासक भी जन्म मरण में ही हैं ।

देवी देवताओं व तीनों गुणों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की पूजा करना तथा भूत पूजा, पितर पूजा, यह सब व्यर्थ की साधना है इन्हें करने वालों को घोर नरक में जाना पड़ेगा । अध्याय 7 का श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 व अध्याय 9 के श्लोक 25 में यह प्रमाण है ।

गीताजी अनुसार जो साधक तीनो गुणों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) तक कि साधना से मिलने वाले लाभ पर ही आश्रित है वे राक्षस स्वभाव को धारण किये हुए मनुष्यों में नीच, शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने वाले मूर्ख मुझ ब्रह्म की भी पूजा नही करते है (गीता अध्याय 7 श्लोक 15)

सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि इस तीन देवताओं की भक्ति करना शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करना है तथा यह अविनाशी भगवान नही है इनकी भी जन्म- मृत्यु होती है। तो इनके उपासकों का मोक्ष सम्भव नही है।

Brahma, Vishnu, Mahesh
Brahma, Vishnu, Mahesh
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है-
तीन देव की जो करते भक्ति।
उनकी कबहु न होवै मुक्ति।।

मूर्ति पूजा एक आन- उपासना है।
इस मास में जो भी पूजा साधना की जा रही है वह बिल्कुल भी शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि नहीं है। शास्त्रों के अनुसार भक्ति विधि केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते है ।

प्रमाण है गीता जी का अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 व 16 , 17 में ।

जो शास्त्र अनुकूल यज्ञ हवन आदि पूर्ण गुरु के माध्यम से नहीं करते उन्हे लाभ नहीं होता। अध्याय 3 के श्लोक 12 में प्रमाण है

श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 - 24 में प्रमाण है। जो शास्त्रों विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करते है न तो उनको लाभ होता है, न उनको कोई सिद्धि प्राप्त होती है तथा न उनकी गति(मोक्ष) होता है अर्थात् व्यर्थ है।

शास्त्रों अनुसार भक्ति विधि सिर्फ तत्वदर्शी संत बताते है तथा जो भी धार्मिक क्रिया करते है वो पूर्ण गुरु के बिना सफल नही हो सकती है तथा पूर्ण गुरु सभी शास्त्रों का जानकार होता है तथा शास्त्रों अनुसार भक्ति विधि बताता है।

इस महीने जो भी धार्मिक क्रिया हिन्दू समाज द्वारा की जाती है वो शास्त्रों के विरुद्ध है तथा उसको करना व्यर्थ है।

वर्तमान में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज है जो शास्त्रो अनुसार भक्ति विधि बताते है जिससे साधक को सभी लाभ प्राप्त होते है तथा पूर्ण मोक्ष की 100% गारंटी है

अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़िए 
https://news.jagatgururampalji.org/sawan-somvar-2020/

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Friday, June 26, 2020

Guru Purnima 2020 [Hindi] Importance of Guru in Human Life

Guru Purnima 2020  [मानव जीवन मे गुरु का महत्व]


हमारे देश में गुरूओं का बहुत सम्मान किया जाता है। क्योंकि एक गुरु ही है जो अपने शिष्य को गलत मार्ग से हटाकर सही रास्ते पर लाता है।


भारतीय संस्कृति बहुत पुरानी है और इसमें गुरु बनाने की परंपरा भी बहुत पुरानी रही है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक गुरु अवश्य बनाता है ताकि गुरु उनके जीवन को नई सकारात्मक दिशा दिखा सके। जिस पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल व सुखमय बना सके एवं मोक्ष प्राप्त कर सके।

गुरु का महत्व बताते हुए परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि

कबीर, गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।।
भावार्थ :- कबीर परमेश्वर जी हमें बता रहे हैं कि बिना गुरु के हमें ज्ञान नहीं हो सकता है। गुरु के बिना किया गया नाम जाप, भक्ति व दान- धर्म सभी व्यर्थ है।
Guru purnima
Importance of guru


कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरु कीन्ह।तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन।
भावार्थ :-कबीर परमेश्वर जी हमें समझाना चाहते हैं कि आप जी श्री राम तथा श्री कृष्ण जी से तो किसी को बड़ा अर्थात् समर्थ नहीं मानते हो। वे तीन लोक के मालिक थे, उन्होंने भी गुरू बनाकर अपनी भक्ति की, मानव जीवन सार्थक किया।

पुराणों में प्रमाण है कि श्री रामचन्द्र जी ने ऋषि वशिष्ठ जी से नाम दीक्षा ली थी और अपने घर व राज-काज में गुरू वशिष्ठ जी की आज्ञा लेकर कार्य करते थे। श्री कृष्ण जी ने ऋषि संदीपनि जी से अक्षर ज्ञान प्राप्त किया तथा श्री कृष्ण जी के आध्यात्मिक गुरू श्री दुर्वासा ऋषि जी थे।


कबीर, हरि सेवा युग चार है, गुरु सेवा पल एक।
तासु पटन्तर ना तुलैं, संतन किया विवेक।
भावार्थ :-बिना गुरु धारण किए परमात्मा की भक्ति चार युग तक करते रहना और गुरु धारण करके एक पल अर्थात् एक नाम का स्मरण भी कर लिया तो उसके समान मनमुखी साधना चार युग वाली नहीं है अर्थात् कम है।


कबीर, ये तन विष की बेलड़ी, गुरु अमृत की खान। शीश दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।

भावार्थ :-यदि गुरु भी नहीं मिलते हैं तो यह मानव शरीर विषय-विकारों रुपी जहर का घर है। गुरु तत्वज्ञान रुपी अमृत की खान है जो मानव को विषय-विकारों से हटाकर अमृत ज्ञान से भर देता है। ऐसा तत्वदर्शी सन्त शीश दान करने से भी मिल जाए तो सस्ता ही जानें। शीश दान का भावार्थ है कि गुरु दीक्षा किसी भी मूल्य में मिल जाए।

■ उपर्युक्त लिखी गई कुछ पंक्तियां एवं दोहों से हमें यह तो समझ में आ गया कि बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं है।

आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे।

Wednesday, May 20, 2020

The End Of Unemployment | बेरोजगारी का खात्मा |

आखिर कैसे होगा ? बेरोजगारी का खात्मा 





बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं।

 गरीबी के नाम पर आज तक अरबों-खरबों रूपये बाँटे जा चुके हैं, किन्तु गरीबी है कि वह जमी हुई है। गरीबी के नाम पर सरकार की समस्त योजनाएं क्यों फेल हो रही हैं? कारण सीधा-सादा है, सच्चे मन से प्रयास न होना।

देश में काम करने वालों की कोई कमी नहीं है, लाखों करोड़ों युवा विभिन्न डिग्रियाँ लिए सुनहरे भविष्य के सपने संजोये बूढ़े हुये जा रहे हैं। इन्हें शासन से काम चाहिये और काम उन्हें तभी मिल सकता है जब ग्रामीण स्तर तक रोजगार के अवसर मुहैय्या हों।


रोजगार के अवसर मुहैय्या कराने के लिये शासन को ग्रामीण स्तर तक रोजगार प्रशिक्षण केंद्र खोलने की व्यस्था करनी चाहिए जहां – पापड़, अचार, मुरब्बा, डबल रोटी, बिस्कुट इत्यादि से लेकर रिपेयरिंग के सम्पूर्ण कार्यों का प्रशिक्षण नि:शुल्क देने की व्यवस्था करनी चाहिये ताकि गरीब से गरीब युवक सेवा, व्यवसाय इत्यादि के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर अपने सपने साकार कर सके।

इससे जहां एक ओर लाखों-करोड़ों युवाओं की रोजी-रोटी की समस्या हल हो सकेगी, वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करने में भी ये संस्थायें सफल हो सकेंगी। यहां एक बात और स्पष्ट कर देना चाहूंगी, शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र शैक्षणिक मामले में अभी भी काफी पिछड़े हुये हैं।

इन संस्थाओं में शैक्षणिक अंकों के आधार पर न रख कर उनके व्यवहारिक ज्ञान व उत्साह को ही आधार माना जाये। विद्यालयों में पढऩे वाले सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण नहीं होते। इनमें से कई द्वितीय, तृतीय व कुछ तो मुश्किल से उत्तीर्ण ही हो पाते हैं किन्तु इसका यह आशय बिल्कुल नहीं है कि पढ़ाई में किन्हीं कारणों से पिछड़े छात्र निपट मूर्ख ही होते हैं बल्कि कई मायनों में ये मेधावी छात्रों से भी तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं।


बस जरूरत है तो उन्हें रोजगार व प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने की, जहां तक मेधावी छात्रों का सवाल है तो उनके लिये सफलता के कई द्वार खुले हैं, उपरोक्त योजनाओं के क्रियान्वयन से जहां एक ओर ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन रूकेगा वहीं लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और चोरी, डकैती, हत्या इत्यादि आपराधिक गतिविधियां भी थमेंगी।


बेरोजगारी को दूर करने के उपाय:-


  • जनसँख्या को नियंत्रित करना
  • कृषि का विकास
  • रोजगार दफ्तरों की स्थापना
  • रचनात्मक कार्य



      भारत में बेरोज़गारी की समस्या अधिक है जिसके कारण गरीबी की समस्या हल नहीं हो पा रही है।
      बेरोज़गारी को दूर करने के लिए:



      शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाज सेवाओं तथा कार्यालयों का विस्तार एवं विकास होने से रोजगार के अवसर बढ़ेगा। इसी तरह बाँध, पुल, सड़क, पार्क एवं नदी-घाटी आदि के निर्माण के कार्यों को बढ़ावा देकर अनेक बेरोजगार व्यक्तियों के श्रम का उपयोग किया जा सकता है।

      सरकार को छोटे उद्योगों को मदद करनी चाहिए, नये कारखाने खोलने चाहिए जहाँ लोगों को नौकरी मिल सके।

      शिक्षा के अतिरिक्त तकनीकी कोचिंग भी देनी चाहिए ताकि लोग भिन्न प्रकार के काम कर सकें और उन्हें रोज़गार मिले।

      सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जिससे हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को जरुर नौकरी मिल सके।

      सरकार को देश की उन्नति के लिए नित्य नयी योजनायें अपनानी चाहिए और सरकार को सरकारी पूंजी को नियंत्रण में रखना चाहिए, भारतीय बाजार को विदेशों में भी फैलाना होगा।


      देश में बेरोजगारी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हालाँकि सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं पर अभी तक वांछनीय प्रगति हासिल नहीं हो पाई है। 

      Thursday, May 14, 2020

      Save The Girl Child | बेटी बचाओं |


      Stop Female Foeticide

      Please Save The Girl Child


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      ●कन्या भ्रूण हत्या का सबसे बड़ा कारण है दहेज प्रथा

      दहेज देने में असमर्थ होने के कारण लोग  बेटी को गर्भ में  ही मार देते है।

      माँ चाहिए, बहन चाहिए और पत्नी भी चाहिए तो बेटी क्यों नहीं चाहिए।


      जैसा कि दोस्तो देखा जाता है कि हर प्रकार से बहन, बेटियों पर अत्याचार होते हैं । इसका मुख्य कारण है, दहेज और समानता का अधिकार न मिलना । इसलिए कहते हैं, बेटियां बोझ होती है और उन पर अत्याचार होते हैं ।
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      ●लोगों की गलत धारणा

      हमारी तथा हमारे समाज की गलत सोच, 
      बेटा हुआ तो नाम रोशन करेगा पैसे कमाएगा, वंश को आगे बढ़ाएगा ओर बुढ़ापे का सहारा बनेगा और 
      बेटी हुई तो कुल का नाश करेगी शादी में दहेज देना पड़ेगा, समाज में बेइज्जत करेगी । इसलिए जब बेटा जन्म लेता है तो खुशियां मनाई जाती है ओर बेटी हुई तो उसे गर्भपात करके मरवा दिया जाता है या उसे नीची नजरों से देखा जाता है ।


      ●बेटा बेटी में असमानता

      अगर बेटी को जन्म दे भी दिया तो उसे आजादी नही दी जाती, स्कूल नही भेजा जाता और बेटा हुआ तो उसे परिवार ओर समाज का खूब प्यार मिलता है, अच्छी से अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाई जाती है ताकि नौकरी लग जाए, वंश आगे बढ़ेगा ओर बुढ़ापे में हमारा सहारा बनेगा ओर बेटी को तो समाज में कलंक माना जाता है।
      समाज अशिक्षित होने के कारण बेटियों पर अत्याचार शुरू किए हुए है । जैसे शिक्षा का अभाव, समाज की सोच ओर दहेज, इन कारणों से आज भी बेटियों को बोझ माना जाता है । लेकिन होता उल्टा ही है, बेटा बड़ा होने के बाद कहना नही मानता । अपने मन की करता है, गलत संगत में रहने लगता है, नशा करने लगता है, चोरी करने लगता है । सही मायने में देखा जाए तो बेटियां ही बुढ़ापे में माता पिता का सहारा बनती हैं ।

      बेटा एक कुल का नाम रोशन करता है लेकिन बेटियां दो कुलों का नाम रोशन करती हैं।


      ●दहेज प्रथा का बढ़ता प्रकोप बेटियों को निगल रहा है ।

      दोस्तो दहेज के कारण भी बेटियों को ये अनमोल मनुष्य जीवन नसीब नही होता और दहेज लेने वाले और देने वाले कोई और नहीं, हमारे अपने ही होते है । एक बेटी को मरवाने में हमारा सहयोग है, समाज का सहयोग है और मान लो दहेज दे भी दिया तो फिर भी दहेज लोभियों के पेट नही भरते और जला देते हैं, फाँसी लटका देते हैं ओर ये करते वक्त उन लोगो के हाथ नही कांपते ।


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      सरकार ने बहुत सारी मुहिम चला रखी हैं । उदाहरण के तौर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ । लेकिन इसके बादजूद भी कन्या भ्रूण हत्या के मामलों निरन्तर वृद्धि होती रही है। लेकिन सरकार की यह मुहिम असफल रही है । वही दूसरी तरफ देखने मे आया है कि संत रामपाल जी महाराज इस मुहिम को सफल बना रहे है।


      संत रामपाल जी महाराज का एक ही सपना।
      नशा मुक्त और दहेज मुक्त हो भारत अपना ।।
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      जब तक सच्चा ज्ञान नहीं हो जाता तब तक समाज की परम्पराएं, सामाजिक भेदभाव, इनसे बाहर नहीं निकल सकते ज्यादातर बेटियों को नहीं अपनाने का कारण यह है कि जब वो बड़ी होगी, उनकी शादी के लिए व दहेज के लिए पैसा जोड़ना पड़ता है ओर दहेज लोभियों के कारण बेटियों को ठुकराया जाता है। लेकिन अब ऐसा नही होगा क्योंकि
      दोस्तो, नाम से ही पता लग रहा होगा कि यह पुस्तक मानव समाज के लिए कितनी अनमोल है ।
       यह पुस्तक संत रामपाल जी द्वारा लिखित है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से विचारो में शुद्धता आती है तथा जब परमात्मा के विधान से परिचित होते है तब इंसान बुराइया करने से बचता है 

      ●संत रामपाल जी महाराज के बताए ज्ञान से ही होगा समाज की कुरीतियों का खात्मा

      ●संत रामपाल जी के सानिध्य में  "बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ " का सपना सच हो रहा है

      A Daughter is not a Burden anymore【सचमुच अब बेटी बोझ नहीं】

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      संत रामपाल जी के ज्ञान से अब बेटियां बोझ नहीं।
      क्योंकि संत रामपाल जी महाराज से जो नाम उपदेश लेता है वो ना तो दहेज लेता है, ना ही दहेज देता है। तथा संत जी के सानिध्य में कई दहेज मुक्त विवाह हुए है।


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      संत रामपाल जी महाराज का कहना है
      अगर, बहु के रूप में बेटी घर लानी है
      तो करनी होगी दहेज मुक्त शादी।

      संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी ना तो दहेज लेते है, ना ही दहेज देते हैं तथा बिना किसी खर्च और बिना किसी आडम्बर के सिर्फ 17 मिनट में शादी करते है।


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      अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़िए पुस्तक  "जीने की राह" तथा  "ज्ञान गंगा"
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      अवश्य सुनिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन रोजाना साधना टीवी शाम 7:30 pm





      Wednesday, May 13, 2020

      High rate of unemployment by covid19 | कोरोना के कहर से बढ़ती बेरोजगारी

      बढ़ती बेरोजगारी  एक गम्भीर समस्या


      नमस्कार दोस्तों वर्तमान में जो हमारे देश में हाहाकार मच रखा है इससे सभी वाकिफ हैं। 2020 से पहले बेरोजगारी का जो दौर चल रहा था वह दौर इस कोरोना महामारी के आने के बाद काफी बढ़ गया हैं


      बेरोजगारी किसी भी देश के विकास में प्रमुख बाधाओं में से एक है। भारत में बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है। शिक्षा का अभाव, रोजगार के अवसरों की कमी और प्रदर्शन संबंधी समस्याएं कुछ ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का कारण बनती हैं। ... विकासशील देशों के सामने आने वाली मुख्य समस्याओं में से एक बेरोजगारी है।

      बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं। 
      बेरोजगारी बढ़ने के कारण देश मे आपराधिक मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है।



      बेरोजगारी के कारण लोग अपने परिवार तथा गांवों से दूर काम करने के लिए जाते है।

      वर्तमान में कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थिति और भी गम्भीर बन चुकी हैं। क्योंकि इस महामारी के कारण पूरे देश मे lockdown है जिसका असर देश के सबसे बड़े
      हिस्से मजदूर वर्ग पर ज्यादा पड़ रहा है। मजदूर वर्ग के लोगों के पास कोई काम नहीं हैै।

      कोरोना वायरस के चलते बिगड़ते हालात के असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोगोंं के रोजगार पर भी पड़ रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक मई में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 27.1 फीसद हो गई है। सीएमआईई के मुताबिक कोविड-19 संकट के चलते देश में बेरोजगारी की दर तीन मई को सप्ताह के दौरान बढ़कर 27.11 प्रतिशत हो गई। अप्रैल के महीने में 9 करोड़ लोगों को अपना रोजगार गंवाना पड़ा।
      तथा lockdown के कारण मजदूर वर्ग पूरी तरह से बेसहारा हो चुका है ना तो उनके पास काम है जिसके कारण उनके पास ना तो पैसे है, ना खाने के लिए राशन और ना ही रहने के लिए घर ।
      मजदूर वर्ग पर इस महामारी का सबसे बड़ा असर दिखने को मिल रहा है क्योंकि इस महामारी के कारण वो अपने परिवार का पोषण करने में भी असमर्थ है।


      सरकार ने अब तक इस संकट से निपटने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय प्रोत्साहन की घोषणा की है, जिसका बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आय और भोजन सहायता मुहैया कराने के लिए है। सीएमआईई की साप्ताहिक श्रृंखला के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से बेरोजगारी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह 29 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान 23.81 प्रतिशत थी। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में मासिक बेरोजगारी की दर 23.52 प्रतिशत थी।
      इस संकट से निपटने के लिए सरकार के कोशिशें कर रही है उसके बावजूद भी कई गरीब लोग भूख से पीड़ित है।

      बेरोजगारी का खत्मा

      यदि हम सद्भक्ति करेंगे तो परमात्मा हमे सभी प्रकार का लाभ देते है  पूर्ण परमात्मा के लिए कुछ भी असम्भव नही है फिर रोजगार देने कौनसी बड़ी बात है।


      सद्भक्ति करने से अद्धभुत लाभ होते है जिनकी गिनती भी नही है।
      इस कोरोना महामारी के समय संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रेरित होकर उनके अनुयायी गरीब, बेरोजगार तथा मजदूर लोगों की मदद राशन का सामान पहुँचाकर कर रहे है।

      संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान जरूर सुने
      साधना चैंनल पर शाम 7:30 बजे से 8:30बजे

      जीने की राह तथा ज्ञान गंगा पुस्तक फ्री में डाउनलोड करके जरूर पढ़ें


      Thursday, May 7, 2020

      मनुष्य जन्म का मूल उद्देश्य | Aim of human life

      परमात्मा ने हमें मनुष्य ही क्यों बनाया है ?


      मानव जीवन परमात्मा की शास्त्राविधि अनुसार साधना करके मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्राप्त होता है।

      84 लाख योनियां भुगतने के बाद एक मानव शरीर प्राप्त होता है। प्राणी की जीवन की यात्रा जन्म से प्रारम्भ हो जाती है। उसकी मंजिल निर्धारित होती है। मानव (स्त्री/पुरूष) की मंजिल मोक्ष प्राप्ति है।
      मानव शरीर मे ही पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। गीता में भी मानव शरीर को मोक्ष का द्वार कहा गया है।
      जो मानव शरीर प्राप्त प्राणी भक्ति नही करते है वे अपना मानव जीवन व्यर्थ कर रहे है 

      कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि :-
       मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारं-बार।
      तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर ना लगता डार।।

      भावार्थ :- कबीर परमात्मा जी ने समझाया है कि हे मानव शरीरधारी प्राणी! यह मानव जन्म (स्त्री/पुरूष) बहुत कठिनता से युगों पर्यन्त प्राप्त होता है।
      यह बार-बार नहीं मिलता। इस शरीर के रहते-रहते शुभ कर्म तथा परमात्मा की भक्ति कर, अन्यथा यह शरीर समाप्त हो गया तो आप पुनः इसी स्थिति यानि मानव शरीर को प्राप्त नहीं कर पाओगे। जैसे वृक्ष से पत्ता टूटने के पश्चात् उसी डाल पर पुनः नहीं लगता।
      इसलिए इस मानव शरीर के अवसर को व्यर्थ न गँवा।

       कबीर जी ने फिर कहा है कि :-
      कबीर, मानुष जन्म पाय कर, नहीं रटैं हरि नाम।
      जैसे कुंआ जल बिना, बनवाया क्या काम।।
      भावार्थ :- मानव जीवन में यदि भक्ति नहीं करता तो वह जीवन ऐसा है जैसे सुंदर कुंआ बना रखा है। यदि उसमें जल नहीं है या जल है तो खारा (पीने योग्य नहीं) है, उसका भी नाम भले ही कुंआ है, परंतु गुण कुंए (Well) वाले नहीं हैं। इसी प्रकार मनुष्य भक्ति नहीं करता तो उसको भी मानव कहते हैं, परंतु मनुष्य वाले गुण नहीं हैं।

      भक्ति तथा धर्म के बिना मानव जीवन नरक बन जाता है

      पूर्व जन्मों में किए शुभ-अशुभ कर्मों तथा भक्ति के कारण कोई स्वस्थ है। वह अचानक रोगी हो जाता है और लाखों रूपये उपचार पर खर्च करके मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। कोई जन्म से रोगी होता है, आजीवन कष्ट भोगकर मर जाता है। कोई निर्धन होता है, कोई धनवान ही जन्मता है। किसी के लड़के-लड़की होते हैं तो किसी को संतान प्राप्त ही नहीं होती। किसी को पुत्री-पुत्री ही संतान होती है, चाहने पर भी पुत्र नहीं होता। यह सब पूर्व जन्मों के कर्मों का फल मानव भोगता है। जब तक पुनः भक्ति प्रारम्भ नहीं करता तो तब तक पूर्व वाले संस्कार ही प्राणी को प्राप्त होते हैं। जिस समय पूर्ण सतगुरू से दीक्षा लेकर मर्यादा से भक्ति करने लगता है तो शुभ संस्कारों में वृद्धि होने से दुःख का वक्त सुख में बदलने लग जाता है।

      मानव शरीर में जो भी प्राप्त हो रहा है, वह पूर्व के जन्मों का संग्रह है। यदि वर्तमान में शुभ कर्म तथा भक्ति नहीं की तो भविष्य का जीवन नरक हो जाएगा।


      मानव जीवन प्राप्त प्राणी को चाहिए कि सांसारिक कर्तव्य कर्म करते-करते आत्म कल्याण का
      कार्य भी करे। जिस कारण से परिवार से आने वाली पूर्व पाप की मार भी टलेगी, परिवार खुशहाल रहेगा। अन्यथा शुभ-अशुभ दोनों कर्मों का फल भोगने से कभी सुख तथा कभी दुःख का कहर भी झेलना पड़ता है।

      मानव शरीर रूपी वस्त्र अनमोल हैं। तत्वज्ञान के अभाव से भक्ति न करके पाप पर पाप करके इस पर दाग लगा रहा है। इस संसार में जीवन अधिक नहीं है। अपने परिवार के पोषण में तथा धन संग्रह करने में जो परेशानी उठा रहा है।
      पाप करके धन जोड़ रहा है। मृत्यु के पश्चात् परिवार तथा संपत्ति धन बेगानी हो जाएगी। इसे जोड़ने में किए पाप तुझे नरक में जलाऐंगे।

      कबीर परमेश्वर जी ने फिर बताया है कि :-
      बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण।
      भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण।।
      भावार्थ :- परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि हे भोले मानव! मुझे आश्चर्य कि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है। न तो शरीर तेरा है, यह भी त्यागकर जाएगा। फिर सम्पत्ति आपकी कैसे है?
      कबीर, काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।
      भक्ति कर दिल पाक से, जीवन है दिन दोय।।

      मानव शरीर प्राप्त प्राणी को पूर्ण संत से दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर आजीवन भक्ति करनी चाहिए ।

      देवता भी इस मानव जीवन के लिए तरसते है। क्योंकि पूर्ण मोक्ष सिर्फ मानव शरीर मे ही प्राप्त कर सकते है।
      वर्तमान समय मे धरती पर पूर्ण सन्त के आये हुए है ये समय बहुत ही अनमोल है

       एक समय मे एक ही पूर्ण सन्त होते है इस समय सो पूर्ण सन्त जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज है जो शास्त्रानुसार भक्ति देते है इस भक्ति को करने से मानव परमात्मा की प्राप्ति कर सकता है तथा पूर्णमोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।


      अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चैंनल शाम 7:30 बजे से 8:30 बजे रोजाना  संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन अवश्य सुने।

      संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पवित्र पुस्तक "जीने की राह" तथा "ज्ञान गंगा" आप हमारी वेबसाइट से नि:शुल्क Download करके पढ़ सकते हैं।

      हमारी वेबसाइट पर पहुँचने के लिए यहाँ क्लिक करें:- www.supremegod.org

      Wednesday, May 6, 2020

      कोरोना महामारी के कारण संकट में देश के गरीब लोग

      कोरोना महामारी में भूख से पीड़ित लोगों की मदद


      भारत में अधिक लोग गरीब तथा मजदूर वर्ग के है ऐसे में कोरोना महामारी के साथ-साथ भूखमरी का डर भी लोगो मे बना हुआ है। 
      Lockdown के चलते लोगो  के पास कामकाज नही है जिस कारण से गरीब तथा मजदूर लोगों के पास भूख मिटाने के लिए खाना भी नही है। 
      इस संकटकालीन परिस्थिति में संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से प्रभावित होकर उनके अनुयायी ऐसे गरीब तथा भूख से पीड़ित लोगों की मदद कर रहे है।
      संत रामपाल जी महाराज बताते है कि दान देने से धन कभी घटता नही है इसलिए उनके अनुयायी परमार्थ के कार्य मे आगे आते रहते है। 
      संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियो का कहना है कि वे ऐसे ही जरूरतमन्द लोगों की मदद करेंगे तथा प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे।



      Sawan Somvar Vrat 2020 [Hindi]

      ◆सावन सोमवार व्रत का महत्व◆ Sawan Somvar Vrat  आइए जानते है सावन के सोमवार व्रत के बारे वास्तविक जानकारी। सावन सोमवार व्रत का ...